Shilpjyoti by Astrobhadauria

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जीवन को निगलते यह जमीन के खड्डे

Posted On: 19 Aug, 2013  
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काठ का उल्लू

Posted On: 26 Jul, 2012  
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राजतंत्र में तंत्र का प्रयोग

Posted On: 23 Jul, 2012  
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जहाँ देखो वहीं अतिक्रमण है !

Posted On: 13 Jul, 2012  
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हमारे ही घर मे हम ही बेगाने !

Posted On: 2 Jul, 2012  
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परछाइयाँ

Posted On: 29 Apr, 2012  
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Others लोकल टिकेट में

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बिलकुब साहब आप का एक शब्द सत्य । सत्य एक ही होता है । मै भी अगर लिखना चाहुं तो यही लिखुंगा । आप ने पहले लिख दिया, तो मुझे लिखने की जरूरत नही है । और फिर भी मुझे कहीं ये लिखना है तो आप का कोपी पेस्ट करना गलत नही है । ना आप कमाना चाहते है ना हम । साजे विचार ज्यादा लोगों तक पहुंचे यही हमारी कामना होती है । कोपीराईट बहुत बडी चीज है और जरूरी भी । सिर्क लेखन के लिये नही है बहुत से क्षेत्र है, जहा आदमी की मेहनत को बचाना जरूरी है । लेखन द्वारा जीसे कमाना है उन के लिये भी जरूरी है । लेकिन ऐसे लेखक जब ब्लोग में लिखते हैं तो सब फोकट में पढ लेते हैं, कोपीराईट का मतलब नही रह जाता । सरकारें जनता को अपनी दुशमन या विरोधी समजती है । खंड खंड भारत को अखंड भारत या मेराभारत महान के नारे पाखंड मात्र है । अखंड भारत सरकार नही बनने दे सकती । अखंड भारत में जनता एक जाती है । जनता की एकता मजबूत से मजबूत सरकारों को उखाड देती है । आप ने जीन जीन बातों का जीकर किया वो भारत को तोडते के तरिके हैं जोडने के नही ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

अबोध जी लव और मैरिज में भेद है,मैरिज एक सांस्कारिक और मर्यादित बंधन है और लव एक मानसिक सम्बन्ध है,इसके लिए उसी प्रकार के संस्कारों की जरूरत पड़ती है जो देश काल और परिस्थिति के अन्दर मान्य हो,स्त्री के पास केवल एक ही धन है जो शील के रूप में माना जाता है,किसी प्रकार के लव नामक छलावे में आकर वह एक बार अपने शील को गँवा बैठती है,उसके बाद का जीवन उसके लिए किराए की गाडी से अधिक नहीं होता है.मैरिज करने के बाद आपस में हमेशा के लिए लव कायम हो जाए तो बात ही क्या है,लेकिन लव करने के बाद मैरिज की और ज़रा सा लव कम हुआ तो तलाक पर पहुँच गए,फिर कैसा लव है,यह लव को बदनाम करने का तरीका है.धन्यवाद आपके विचारों के लिए,आशा है आप इसी प्रकार से सुझाव देते रहेंगे.

के द्वारा: astrobhadauria astrobhadauria




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